अपनी झलक ये ज़िंदगी
Kavita wahi jo sabko bhaye aur sbke dilo ko chhuu jaye
By Anant Yadav
About the Book
*अपनी झलक ये ज़िंदगी* भावनाओं, प्रेम, यादों और रिश्तों से जुड़ी एक संवेदनशील काव्य-रचना है। इसमें ज़िंदगी के उन छोटे-छोटे एहसासों को शब्द दिए गए हैं, जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, लेकिन कह नहीं पाते।
“### लेखक की ओर से *अपनी झलक ये ज़िंदगी* मेरे लिए सिर्फ़ एक किताब नहीं है। यह उन एहसासों, यादों और बातों का हिस्सा है जिन्हें मैंने महसूस किया, जिया और फिर शब्दों में उतारने की कोशिश की। कुछ बातें हम किसी से कह नहीं पाते। कुछ रिश्ते अधूरे रह जाते हैं, कुछ लोग दूर होकर भी यादों में पास रहते हैं और कुछ पल बहुत छोटे होकर भी पूरी ज़िंदगी हमारे साथ चलते हैं। इस किताब में उन्हीं अनकहे एहसासों की कुछ झलकियाँ हैं। मैंने कोशिश की है कि शब्द बहुत मुश्किल न हों, क्योंकि भावनाओं को समझने के लिए भारी शब्दों की नहीं, सच्चाई की ज़रूरत होती है। अगर इस किताब का कोई पन्ना पढ़ते हुए आपको अपना कोई पल, कोई अपना, कोई अधूरी बात या कोई पुरानी याद याद आ जाए, तो मेरे लिए यही इस किताब की सबसे खूबसूरत बात होगी। **क्योंकि शायद ज़िंदगी की सबसे सच्ची कहानियाँ वही होती हैं, जिनमें हमें अपनी झलक मिल जाती है।** — **अनंत यादव**”
Bibliographic Information
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