ANANT YADAV
Poetics & Stanzas

Poetry Archive

Verses written in the quiet hours, exploring the geography of silence, time, and human vulnerability.

Themes:ContemporaryLove
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She is rajya sabha

Love

She is the Rajya Sabha, strong and bold, Every word she says feels of gold, She argues like she won’t ever fall, And I just stand there, losing it all. And I...I was the Vice President, standing where authority begins, but understanding starts much later. She spoke in layers, not every word for the ears, some meant only for the soul that knew how to listen. Sit down, she says with fire, but I stand there wanting more, not to win-just to make her smile once. I try to convince her softly, Come on… don’t be so hard on me, Still, I stay even every debate,every silence, because even when she disagree, she’s the only one I choose. She is the Rajya Sabha, strong and free… And I’m still hoping she chooses me.
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Contemporary 1 min

आओ बैठ अनंत रंजिशें माफ़ करेंगे....

माफ़ कर दो

ख़फ़ा न हो हमसे, कब तक ये बेरुख़ी सहेंगे? बोलो भी, कब तक इस बे-ज़ार ख़ामोशी में रहेंगे l अगर दिल में कोई मलाल है, तो उसे ज़ुबाँ दो, यूँ चुप रहे तो फ़ासले दरमियाँ घर करेंगे। मोहब्बत तो बे-असर हो जाती है इस लंबी ख़ामोशी से, हम भी ज़िद पे आए तो रिश्ते ही बिखर जाया करेंगे। जो बात नहीं कोई, तो गुफ़्तगू का आग़ाज़ करेंगे, और गर है कोई रंजिश, तो आओ बैठ कर बात करेंगे। हसरत ही रह जाती होगी उन दिलों में जहाँ दूरियाँ बस्ती होंगी, हम तो हर हाल में राब्ता बहाल करेंगे। क्यों तन्हा से, बेचारे से, इस सन्नाटे में रहना? आओ आज फिर बैठ अनंत रंजिशें माफ़ करेंगे... दिल की गर्द साफ हो, तो फिर वो आरज़ू करेंगे, रंजिशें गर दूर हो जाएं, तो अनंत बात करेंगे।
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I love you

Love

People say, “I love you.” But the way I feel .... I don’t just love you, I feel peace when I hear your name. I don't just miss the way you are, I look for you in small things in songs, in silence, in the dark sky. If I could, I’d sit beside you all my days, In quiet, soft, and steady ways. No need for words or things to do, For silence feels like home with you. And if love had a home, it wouldn’t be a place- it would be you.
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वो कैसी है

चांद है वो

किसी ने पूछा, “वो कैसी है?” मैंने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ अर्ज़ किया पढ़ना हो उसे, तो मेरी किताब का हर वरक़ पलट आओ, जानना हो उसे, तो लफ़्ज़ों के दरमियान उतर जाओ। उसकी नज़ाकत समझनी हो, तो हर मिसरा महसूस कर जाओ, उसका सलीक़ा देखना हो, तो मेरी ग़ज़लों में खो जाओ। लिखा है मैंने उस पर हर एहसास, हर ख़ामोश सी बात, बे-शुमार जानना हो, तो मेरी तहरीर का हर राज़ पढ़ आओ। मुझसे तुम इतना जान पाओगे, कि मैं बताता ही रह जाऊँगा, और तुम हो कि उसे कभी पूरा जान न पाओ। हर एक चेहरे में ढूँढूँ उसे, तुम भी देखने आओ, मिले जो उसके जैसा कोई, तो शायद तुम भी पा जाओ। समझ न पाओ जब तुम फिर भी उसकी पहचान, तो बस इक बार मिलने को, तुम मेरे पास चले आओ। न बोलूँगा कोई लफ़्ज़, न कोई बात मैं कहूँगा, निगाहों से जो कह दूँ मैं, वो सारी दास्ताँ समझ पाओ।
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A little more

Love

Whenever I loved, I gave my all, never thinking what may fall. I stayed even when I felt alone, still made their pain my own. I waited for words that never came, still I stayed, still I played the same game. I kept quiet when things went wrong, just to keep the bond strong. But love is not always giving more, not standing tired at someone’s door. It should feel warm, it should feel right, not like a never-ending fight. So this time, I choose my peace, from all this hurt, I slowly release. I’ll still love, but not like before, I’ll respect myself a little more. And if love comes again one day, I won’t lose myself on the way.
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पसंद हो तुम

Love

उन्स है तुमसे, कोई आदत तो नहीं तुम्हें हर रोज़ सोचना, मसरूफियत तो नहीं, तुम तो ख़ुद महकती हुई इक शाम जैसी हो तुम्हें फूलों से सजाना, ज़रूरत तो नहीं, तुम्हारी सादगी पे फ़लक भी नाज़ करता है तुम्हें ख़ुद को सँवारना, ज़रूरत तो नहीं, तुम आईनों से ख़ुद की शिकायत क्यों करोगी तुम्हें ख़ुद को निहारना, ज़रूरत तो नहीं, तुम्हारी एक मुस्कान ही काफ़ी है दिलों को तुम्हें यूँ क़हर ढाना, ज़रूरत तो नहीं, तुम तो हर लिबास में बेहद हसीं लगती हो तुम्हें और रंग लगाना, ज़रूरत तो नहीं, तुम्हें देखे बिना भी इश्क़ हो जाए किसी को तुम्हें दिल में बसाना, ज़रूरत तो नहीं, तुम्हें चाँद कहूँ तो चाँद छोटा सा लगेगा तुम्हें चाँद बताना, ज़रूरत तो नहीं, तुम जैसी हो, वैसी ही मुकम्मल सी लगती हो तुम्हें ख़ुद को बदलना, ज़रूरत तो नहीं
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एक मै हूँ

love

एक मैं हूँ जिसे चाँद से मोहब्बत है, एक वो है जिसे मेरे लिए चाँद-सा दिखना पसंद है। वो जब हँसती है तो जैसे रात महकने लगती है, मुझे उसका यूँ बेवजह खिलखिलाना पसंद है। चाँद तो हर महीने घटता-बढ़ता रहता है मगर, उसका चेहरा हर मौसम में वैसा रहना पसंद है। लोग पूछते हैं मोहब्बत की तफ़्सील क्या है, मुझे उसे लिखना पसंद है, उसे मेरा लिखना पसंद है। एक मैं हूँ जिसे चाँद से मोहब्बत है, एक वो है जिसे मेरे लिए चाँद-सा दिखना पसंद है।
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Contemporary 2 min

बताया करो

Special one

तुम बस अपनी पसंद बताया करो, मैं तुम्हारी हर पसंद को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाता जाऊँगा। तुम्हें हरा पसंद है, तो तुम्हारे लिए मौसम में हरियाली ढूँढ लाऊँगा, तुम्हें चूड़ियों की खनक अच्छी लगती है, तो तुम्हारी कलाई पर हर खुशी की आवाज़ सजा दूँगा, पायल पसंद है तो तुम्हारे कदमों के साथ चलती एक छोटी-सी धुन खरीद लाऊँगा। तुम्हें साड़ी पसंद है तो तुम्हें उसमें देखकर हर बार ऐसे ही ठहर जाऊँगा, तुम्हें चाँद अच्छा लगता है, तो हर रात तुम्हें उसकी तरफ़ देखकर ये कहने का बहाना दूँगा “देखो, आज फिर तुमसे कम खूबसूरत है।” तुम्हें फूल पसंद हैं, तो गुलदस्ता नहीं, तुम्हारी पसंद के फूलों का एक छोटा-सा मौसम ले आऊँगा। तुम्हें बारिश पसंद है, तो पहली बूंद पर तुम्हें याद करूँगा, और अगर तुम्हें भीगना अच्छा लगे, तो छतरी लेकर नहीं, तुम्हे साथ लेकर चलूँगा। तुम्हें मीठा पसंद है, तो हर मिठास तुम्हारे नाम कर दूँगा, और अगर तुम्हें चुप रहना पसंद हो, तो अपनी सारी बातें रोककर तुम्हारी खामोशी सुनूँगा। तुम बस अपनी पसंद बताती रहना, मैं तुम्हें बदलने की कोशिश नहीं करूँगा बस तुम्हारी पसंद की दुनिया में अपनी मोहब्बत की थोड़ी-सी जगह माँगता रहूँगा।
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चुप न रहा करो

Prem

तुम चुप न रहा करो, कुछ तो कहा करो, मन में जो भी हो, थोड़ा-सा ही but मुझसे साझा तो किया करो। हर बात पर रूठना ज़रूरी नहीं, पर कभी मुझसे लड़ भी लिया करो, ग़लती मेरी हो तो डाँट लिया करो, और तुम्हारी हो तो मुझसे छुपाया मत करो। हम इतने अपने हैं तो थोड़ा-सा हक़ भी जताया करो, कभी बिना वजह पूछ लिया करो “कहाँ हो?” कभी यूँ ही कह दिया करो “आज तुमसे बात करनी है।” मुझे तुम्हारी हर बात का जवाब नहीं चाहिए, बस तुम्हारी ख़ामोशी में अजनबी मत बनाया करो। जो बात दिल में अटक जाए, उसे रात भर मत रखा करो, लड़ लेना, झगड़ लेना, नाराज़ हो जाना बस यूँ बिना कुछ कहे दूर मत जाया करो। तुम चुप न रहा करो, कुछ तो बोला करो… लड़कर ही सही, मगर हर बार मुझे अपना होने का एक छोटा-सा हक़ तो दिया करो।
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सुकून-ए-दीदार

प्रेम

तुम्हारी एक झलक पे मुझे सुकून मिलता है, आओ कभी मिलकर एक नया जहां आबाद करते हैं। तुम्हारी हर बात से दिल को करार मिलता है, आओ कभी हम पास बैठ कर गूफ्तगू करते हैं। तुम्हारी एक खुशी में हम ख़ुद राफ्ता हो जाते हैं, आओ कभी की इस हंसी पे हम ऐतबार करते हैं। तुम्हारी ये झुमके साड़ी का शहर हमें बेताब करता है, तुम्हारी वो पुरानी बातें सुननी है,कैसी हो, आओ कभी सच में है हम गुम होने की आस करते हैं। सुनो है तुम्हारी शोखियाँ बढ़ती जा रही हैं आओ कभी हमें भी तुम्हारी उस तबस्सुम का शरीक ए हयात बनाना है। फ़क़त तमन्ना इतनी है कि आओ कभी मेरे आंखों का नूर और दिल के करार बनाने । देखा हमने तुम्हे रश्क-ए-क़मर हो तुम, आओ कभी अब दीदार-ए-महताब को और कितना तरसना है।......... (बस हसरत इतनी है कि तुम दिल की तस्कीन बन जाओ, छोड़कर चाँद को पीछे, मेरी आँखों का नूर-ए-यकीन बन जाओ।)
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