ANANT YADAV
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Poetry 4.8 / 5.0

चुप मत रहा करो

जो दिल में है, कह दिया करो

By Anant Yadav

About the Book

चुप मत रहा करो* उन अनकही बातों और ख़ामोश एहसासों की किताब है, जो अक्सर दिल में रह जाते हैं। प्रेम, रिश्तों, दूरी और इंतज़ार के बीच यह किताब एक छोटी-सी याद दिलाती है—जो कहना है, कभी-कभी उसे कह देना चाहिए।

चुप मत रहा करो उन भावनाओं की किताब है जो अक्सर शब्दों तक पहुँचने से पहले ही ख़ामोशी में खो जाती हैं। यह प्रेम, दूरी, इंतज़ार, अधूरे रिश्तों और उन बातों की कहानी है जिन्हें हम कहना चाहते हैं, लेकिन किसी डर, झिझक या परिस्थिति के कारण कह नहीं पाते। कभी किसी अपने की ख़ामोशी बहुत कुछ कह जाती है, और कभी वही ख़ामोशी रिश्तों के बीच ऐसी दूरी बना देती है जिसे बाद में शब्द भी मिटा नहीं पाते। यह किताब उन्हीं पलों को महसूस करने की कोशिश है—जहाँ एक आवाज़ की कमी, एक जवाब का इंतज़ार और एक अधूरी बात दिल में बहुत देर तक ठहरी रहती है। शायद कुछ रिश्तों को बचाने के लिए बड़े वादों की नहीं, बस समय पर कहे गए कुछ सच्चे शब्दों की ज़रूरत होती है। क्योंकि जो बात आज कह सकते हैं, उसे कल के लिए छोड़ देना कभी-कभी सिर्फ़ ख़ामोशी नहीं होती-वह एक ऐसी कमी बन जाती है, जिसकी आवाज़ उम्र भर सुनाई देती रहती है
Author's Note

### लेखक की ओर से *चुप मत रहा करो* मेरे लिए उन बातों की किताब है, जिन्हें हम कहना तो चाहते हैं, लेकिन अक्सर कह नहीं पाते। कभी शब्द कम पड़ जाते हैं, कभी रिश्ते का डर रोक देता है और कभी हम सोचते हैं कि सामने वाला बिना कहे ही समझ जाएगा। लेकिन हर ख़ामोशी समझी नहीं जाती। इस किताब में प्रेम है, इंतज़ार है, दूरी है, कुछ अधूरे रिश्ते हैं और उन पलों की याद है जब बस एक बात कह देने से शायद सब कुछ थोड़ा अलग हो सकता था। मैंने इन भावनाओं को किसी कहानी की तरह नहीं, बल्कि उन एहसासों की तरह लिखा है जिन्हें हममें से कई लोग कभी न कभी जी चुके हैं। मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़ते हुए आपको सिर्फ़ मेरी लिखी हुई बातें न मिलें, बल्कि कहीं न कहीं अपनी कोई याद, अपना कोई रिश्ता या कोई अनकहा शब्द भी मिल जाए। **अगर किसी अपने से कुछ कहना बाकी है, तो कह दीजिए। क्योंकि कुछ ख़ामोशियाँ वक़्त के साथ ख़त्म नहीं होतीं—वे बस उम्र भर हमारे भीतर बोलती रहती हैं।** — **अनंत यादव**

Bibliographic Information

PublisherKathaankan publication
ISBN978-81-987654-0-1
Release Date2026-10-20
Pages168 Pages
LanguageHindi
Reader Responses

Reviews & Reflections

maya

nice poetry

Aarav Sharma

An extraordinary collection. Yadav's ability to express deep philosophical truths with such minimal, lyrical language is breathtaking.

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