जा रही हो एक ऐसी कहानी है जहाँ विदाई सिर्फ़ किसी के जाने का नाम नहीं, बल्कि पीछे छूटती यादों, अधूरी बातों और उस ख़ामोशी का एहसास है जो किसी के चले जाने के बाद रह जाती है। यह किताब मोहब्बत, बिछड़ने और उस आख़िरी पल को महसूस करती है, जब दिल बस यही कहना चाहता है—“थोड़ा और ठहर जाओ।”
*जा रही हो* सिर्फ़ किसी के चले जाने की कहानी नहीं है। यह उस पल की कहानी है जब कोई सामने होता है, फिर धीरे-धीरे दूर जाने लगता है और हमारे पास उसे रोकने के लिए शब्द तो होते हैं, लेकिन शायद कहने की हिम्मत नहीं होती।
इस किताब में मोहब्बत है, लेकिन सिर्फ़ पाने की नहीं—खोने की भी। इसमें इंतज़ार है, अधूरी बातें हैं, पुरानी यादें हैं और वह ख़ामोशी है जो किसी अपने के जाने के बाद अचानक बहुत गहरी लगने लगती है। कभी-कभी किसी इंसान का जाना सिर्फ़ एक विदाई नहीं होता; उसके साथ हमारी ज़िंदगी का एक हिस्सा, कुछ आदतें और कई छोटी-छोटी खुशियाँ भी चली जाती हैं।
*जा रही हो* उन रिश्तों की बात करती है जिनमें सब कुछ कह देने के बावजूद कुछ न कुछ अनकहा रह जाता है। वह आख़िरी बातचीत, वह आख़िरी मुलाक़ात, वह सवाल जिसका जवाब नहीं मिला और वह बात जिसे समय रहते कहा नहीं गया—ये सभी इस किताब के भावनात्मक संसार का हिस्सा हैं।
यह किताब किसी एक व्यक्ति की कहानी तक सीमित नहीं है। इसमें हर उस इंसान के लिए कुछ है जिसने कभी किसी को जाते हुए देखा है और मन ही मन चाहा है कि काश वह थोड़ा और रुक जाता। हर उस व्यक्ति के लिए जिसने किसी रिश्ते को बचाने की कोशिश की, किसी को खोया, या फिर किसी की याद को अपने भीतर चुपचाप संभालकर रखा।
अनंत यादव की *जा रही हो* प्रेम को एक अलग नज़र से देखती है—जहाँ मिलना जितना खूबसूरत है, बिछड़ना उतना ही सच्चा। यह किताब शायद आपको किसी पुराने चेहरे की याद दिलाए, किसी अधूरी बातचीत तक वापस ले जाए या उस पल को फिर से महसूस करा दे जिसे आपने बहुत पहले पीछे छोड़ दिया था।
क्योंकि कुछ लोग चले जाते हैं, लेकिन उनसे जुड़ी हुई ज़िंदगी हमारे भीतर कहीं रह जाती है—और शायद सबसे मुश्किल विदाई वही होती है, जिसमें इंसान चला जाता है, पर उसकी याद जाने से इंकार कर देती है।
Author's Note
“ लेखक की ओर से
*जा रही हो* उन भावनाओं से निकली है जिन्हें विदाई के समय शब्द नहीं मिल पाते। यह किताब मोहब्बत, बिछड़ने, यादों और उन अधूरी बातों के बारे में है जो किसी के चले जाने के बाद भी हमारे साथ रहती हैं।
अगर कभी किसी को रोकना चाहा हो, लेकिन रोक न पाए हों—तो शायद इस किताब के कुछ पन्ने आपको अपने लगेंगे।
कुछ लोग चले जाते हैं, पर उनकी यादें कहीं नहीं जातीं।
— अनंत यादव”
Bibliographic Information
PublisherShivija Publication
Release Date2026-11-07
Pages102 Pages
Languagehindi
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