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Contemporary
आओ बैठ अनंत रंजिशें माफ़ करेंगे....
माफ़ कर दो
1 min read 2026-09-12
ख़फ़ा न हो हमसे, कब तक ये बेरुख़ी सहेंगे?
बोलो भी, कब तक इस बे-ज़ार ख़ामोशी में रहेंगे l
अगर दिल में कोई मलाल है, तो उसे ज़ुबाँ दो,
यूँ चुप रहे तो फ़ासले दरमियाँ घर करेंगे।
मोहब्बत तो बे-असर हो जाती है इस लंबी ख़ामोशी से,
हम भी ज़िद पे आए तो रिश्ते ही बिखर जाया करेंगे।
जो बात नहीं कोई, तो गुफ़्तगू का आग़ाज़ करेंगे,
और गर है कोई रंजिश, तो आओ बैठ कर बात करेंगे।
हसरत ही रह जाती होगी उन दिलों में जहाँ दूरियाँ बस्ती होंगी,
हम तो हर हाल में राब्ता बहाल करेंगे।
क्यों तन्हा से, बेचारे से, इस सन्नाटे में रहना?
आओ आज फिर बैठ अनंत रंजिशें माफ़ करेंगे...
दिल की गर्द साफ हो, तो फिर वो आरज़ू करेंगे,
रंजिशें गर दूर हो जाएं, तो अनंत बात करेंगे।
— Anant Yadav
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