Size:
Tone:
Contemporary
वो कैसी है
चांद है वो
1 min read 2026-09-12
किसी ने पूछा, “वो कैसी है?”
मैंने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ अर्ज़ किया
पढ़ना हो उसे, तो मेरी किताब का हर वरक़ पलट आओ,
जानना हो उसे, तो लफ़्ज़ों के दरमियान उतर जाओ।
उसकी नज़ाकत समझनी हो, तो हर मिसरा महसूस कर जाओ,
उसका सलीक़ा देखना हो, तो मेरी ग़ज़लों में खो जाओ।
लिखा है मैंने उस पर हर एहसास, हर ख़ामोश सी बात,
बे-शुमार जानना हो, तो मेरी तहरीर का हर राज़ पढ़ आओ।
मुझसे तुम इतना जान पाओगे, कि मैं बताता ही रह जाऊँगा,
और तुम हो कि उसे कभी पूरा जान न पाओ।
हर एक चेहरे में ढूँढूँ उसे, तुम भी देखने आओ,
मिले जो उसके जैसा कोई, तो शायद तुम भी पा जाओ।
समझ न पाओ जब तुम फिर भी उसकी पहचान,
तो बस इक बार मिलने को, तुम मेरे पास चले आओ।
न बोलूँगा कोई लफ़्ज़, न कोई बात मैं कहूँगा,
निगाहों से जो कह दूँ मैं, वो सारी दास्ताँ समझ पाओ।
— Anant Yadav
Share Poem: