Size:
Tone:
Contemporary
बताया करो
Special one
2 min read 2026-09-12
Poet's Voice Recitation
तुम बस अपनी पसंद बताया करो,
मैं तुम्हारी हर पसंद को
अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाता जाऊँगा।
तुम्हें हरा पसंद है,
तो तुम्हारे लिए मौसम में हरियाली ढूँढ लाऊँगा,
तुम्हें चूड़ियों की खनक अच्छी लगती है,
तो तुम्हारी कलाई पर
हर खुशी की आवाज़ सजा दूँगा,
पायल पसंद है तो
तुम्हारे कदमों के साथ चलती
एक छोटी-सी धुन खरीद लाऊँगा।
तुम्हें साड़ी पसंद है
तो तुम्हें उसमें देखकर
हर बार ऐसे ही ठहर जाऊँगा,
तुम्हें चाँद अच्छा लगता है,
तो हर रात तुम्हें उसकी तरफ़ देखकर
ये कहने का बहाना दूँगा
“देखो, आज फिर तुमसे कम खूबसूरत है।”
तुम्हें फूल पसंद हैं,
तो गुलदस्ता नहीं,
तुम्हारी पसंद के फूलों का
एक छोटा-सा मौसम ले आऊँगा।
तुम्हें बारिश पसंद है,
तो पहली बूंद पर तुम्हें याद करूँगा,
और अगर तुम्हें भीगना अच्छा लगे,
तो छतरी लेकर नहीं,
तुम्हे साथ लेकर चलूँगा।
तुम्हें मीठा पसंद है,
तो हर मिठास तुम्हारे नाम कर दूँगा,
और अगर तुम्हें चुप रहना पसंद हो,
तो अपनी सारी बातें रोककर
तुम्हारी खामोशी सुनूँगा।
तुम बस अपनी पसंद बताती रहना,
मैं तुम्हें बदलने की कोशिश नहीं करूँगा
बस तुम्हारी पसंद की दुनिया में
अपनी मोहब्बत की थोड़ी-सी जगह माँगता रहूँगा।
— Anant Yadav
Share Poem: