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Contemporary
एक मै हूँ
love
1 min read 2026-09-12
एक मैं हूँ जिसे चाँद से मोहब्बत है,
एक वो है जिसे मेरे लिए चाँद-सा दिखना पसंद है।
वो जब हँसती है तो जैसे रात महकने लगती है,
मुझे उसका यूँ बेवजह खिलखिलाना पसंद है।
चाँद तो हर महीने घटता-बढ़ता रहता है मगर,
उसका चेहरा हर मौसम में वैसा रहना पसंद है।
लोग पूछते हैं मोहब्बत की तफ़्सील क्या है,
मुझे उसे लिखना पसंद है, उसे मेरा लिखना पसंद है।
एक मैं हूँ जिसे चाँद से मोहब्बत है,
एक वो है जिसे मेरे लिए चाँद-सा दिखना पसंद है।
— Anant Yadav
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